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दिल्ली-NCR में 'वर्क फ्रॉम होम' बना मजबूरी या नया ट्रेंड? कंपनियों और कर्मचारियों के बीच छिड़ी नई बहस

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों (NCR) में 'वर्क फ्रॉम होम' (Work From Home - WFH) यानी घर से काम करने का चलन एक बार फिर सुर्खियों में है। कभी कोरोना काल की मजबूरी रहा यह मॉडल अब दिल्ली-NCR की वर्क कल्चर (कार्य संस्कृति) का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है। हाल ही में आए कुछ सर्वे और रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में ट्रैफिक, भयंकर प्रदूषण और कड़कड़ाती गर्मी या बदलते मौसम के चलते 'वर्क फ्रॉम होम' की मांग तेजी से बढ़ी है। आइए जानते हैं कि इस समय दिल्ली में WFH को लेकर क्या स्थिति है।

क्यों बढ़ रही है 'वर्क फ्रॉम होम' की मांग?

ट्रैफिक और लंबे सफर से निजात: दिल्ली, नोएडा, और गुरुग्राम के बीच सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए ट्रैफिक एक बड़ी मुसीबत है। रोजाना 2 से 3 घंटे जाम में बिताने के बजाय लोग घर से काम करने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बच रहा है।

बदलते मौसम और प्रदूषण का असर: दिल्ली में हर साल सर्दियों में बढ़ने वाला प्रदूषण (AQI) और गर्मियों में रिकॉर्ड तोड़ती धूप के कारण प्रशासन को कई बार कंपनियों से वर्क फ्रॉम होम देने की अपील करनी पड़ती है।

बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस: कर्मचारियों का मानना है कि घर से काम करने के दौरान वे अपने परिवार को अधिक समय दे पाते हैं और मानसिक रूप से भी कम तनाव महसूस करते हैं।

कंपनियों का क्या है रुख? (हाइब्रिड मॉडल की तरफ झुकाव)

दिल्ली-NCR की ज्यादातर आईटी (IT), टेक और डिजिटल मीडिया कंपनियों ने अब **'हाइब्रिड मॉडल'** को अपना लिया है। इसके तहत कर्मचारियों को हफ्ते में 2 या 3 दिन ऑफिस आना होता है और बाकी दिन वे घर से काम कर सकते हैं। हालांकि, कुछ बड़ी कंपनियां अब पूरी तरह से 'वर्क फ्रॉम ऑफिस' पर जोर दे रही हैं, क्योंकि उनका मानना है कि ऑफिस में टीम के साथ बैठकर काम करने से प्रोडक्टिविटी (उत्पादकता) बेहतर होती है।

चुनौतियां भी नहीं हैं कम

जहाँ एक तरफ इसके कई फायदे हैं, वहीं घर से काम करने में कुछ दिक्कतें भी आ रही हैं:

लगातार काम के घंटे: कई कर्मचारियों की शिकायत है कि लॉग-इन और लॉग-आउट का समय तय न होने के कारण उनके काम के घंटे बढ़ गए हैं।

नेटवर्क और बिजली की समस्या: दिल्ली के कुछ इलाकों में गर्मियों के दौरान पावर कट और इंटरनेट स्लो होने की वजह से काम में रुकावट आती है।

विशेषज्ञों की राय: मानव संसाधन (HR) विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में पूरी तरह से वर्क फ्रॉम होम के बजाय 'हाइब्रिड मॉडल' ही दिल्ली जैसे महानगरों का भविष्य होगा। यह कंपनियों की लागत भी घटाता है और कर्मचारियों को लचीलापन (Flexibility) भी देता है।

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