नई दिल्ली/वाशिंगटन:अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनावपूर्ण कूटनीति के बीच पाकिस्तान को एक बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा मुस्लिम देशों को 'अब्राहम अकॉर्ड्स' (इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य करने का समझौता) में शामिल होने की अपील के बाद, पाकिस्तान के इनकार पर अमेरिका के वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सीनेटर ग्राहम ने अमेरिका-ईरान वार्ता में पाकिस्तान की 'तटस्थ मध्यस्थ' (Neutral Mediator) की भूमिका पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका 'समस्याग्रस्त': लिंडसे ग्राहम
सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बेहद तीखा पोस्ट साझा करते हुए कहा:
"मेरे लिए काफी समय से यह स्पष्ट है कि एक मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका समस्याग्रस्त (Problematic) से कहीं ज्यादा है। इजरायल के प्रति उनकी दुश्मनी बहुत पुरानी और जगजाहिर है। यह भी अकाट्य है कि ईरानी सैन्य विमानों को पाकिस्तानी हवाई अड्डों पर शरण दी जा रही है। ऐसे में इजरायल के खिलाफ शीर्ष पाकिस्तानी अधिकारियों की पुरानी बयानबाजी बेहद चिंताजनक है।"
ग्राहम ने सीधे शब्दों में कहा कि जो देश खुद निष्पक्ष नहीं है और जिसके हवाई अड्डों पर ईरान के सैन्य विमान खड़े हैं, वह अमेरिका और ईरान के बीच निष्पक्ष मध्यस्थ कैसे हो सकता है?
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर एक लंबी पोस्ट में सऊदी अरब, कतर, ओमान और पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देशों से 'अब्राहम अकॉर्ड्स' में शामिल होने और इजरायल को मान्यता देने की अपील की थी।
राष्ट्रपति ट्रम्प की इस अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक इंटरव्यू में साफ कह दिया था कि पाकिस्तान कभी भी ऐसे किसी समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा जो उसकी बुनियादी विचारधारा के खिलाफ हो। ख्वाजा आसिफ ने इजरायल पर भरोसा करने से इनकार करते हुए कहा था कि पाकिस्तान का पासपोर्ट दुनिया का अकेला ऐसा पासपोर्ट है, जिस पर साफ लिखा है कि यह 'इजरायल की यात्रा के लिए वैध नहीं है।'
इसी बयान पर पलटवार करते हुए सीनेटर ग्राहम ने कहा कि भले ही पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का यह वीडियो थोड़ा पुराना हो, लेकिन इजरायल के प्रति उनकी यह नफरत आज भी वैसी ही है। ग्राहम ने मांग की है कि पाकिस्तान तुरंत राष्ट्रपति ट्रम्प की इस अपील पर अपना आधिकारिक और स्पष्ट जवाब दे।
पाकिस्तानी कूटनीति के लिए क्यों बढ़ा संकट?
विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान अप्रैल 2026 से ही इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता (Islamabad Peace Talks) की मेजबानी करके वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक वापसी की कोशिश कर रहा था। लेकिन अब अमेरिका के भीतर से ही पाकिस्तान की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
मुख्य चिंताएं:
ईरान से नजदीकी: अमेरिका को खुफिया रिपोर्ट मिली हैं कि क्षेत्रीय तनाव के दौरान ईरान ने अपने कुछ सैन्य विमानों और संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए पाकिस्तानी एयरबेस का इस्तेमाल किया है।
अब्राहम अकॉर्ड्स का विरोध: पाकिस्तान द्वारा इजरायल को मान्यता देने से साफ इनकार करने के बाद, अमेरिकी प्रशासन का एक बड़ा धड़ा पाकिस्तान को इस कूटनीति से बाहर करने की मांग कर रहा है।
कूटनीतिक विफलता का डर: कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होती है, तो वाशिंगटन इसका पूरा ठीकरा पाकिस्तान की गैर-तटस्थ भूमिका पर फोड़ सकता है।
