नई दिल्ली/तेहरान: पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहा अमेरिका और ईरान का संघर्ष एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना द्वारा दक्षिणी ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास किए गए नए हमलों के बाद तेहरान ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। ईरान ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि इन हमलों का "कड़ा और जोरदार जवाब" दिया जाएगा।
इस बीच, ईरान के सुप्रीम लीडर ने दुनिया भर के इस्लामी देशों से इस आक्रामकता के खिलाफ एकजुट होने की बड़ी अपील की है।
होर्मुज स्ट्रेट बना दुनिया के लिए 'फ्लैश पॉइंट'
ईरान ने इस टकराव के बीच होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को अपना सबसे बड़ा और अचूक हथियार बताया है। यह जलमार्ग पूरी दुनिया की लाइफलाइन माना जाता है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल (Crude Oil) और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरती है।
ईरान की ओर से संकेत दिए गए हैं कि अगर अमेरिका अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो इस रूट पर पूरी तरह नाकेबंदी की जा सकती है, जिससे पूरी दुनिया में ऊर्जा का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
क्यों खास है होर्मुज स्ट्रेट?
ओमान और ईरान के बीच स्थित यह जलमार्ग महज 21 मील चौड़ा है। अगर यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिसका सीधा असर भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
सीजफायर और बातचीत के बीच नया हमला
यह नया तनाव ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से शांति समझौता (Peace Deal) कराने की कोशिशें चल रही थीं। दोनों पक्षों ने पहले 8 अप्रैल को हुए अस्थायी सीजफायर को आगे बढ़ाने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने पर चर्चा शुरू की थी।
लेकिन हाल ही में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने लारक द्वीप के पास ईरानी मिसाइल साइटों और नावों को निशाना बनाया। अमेरिका का दावा है कि यह कार्रवाई 'आत्मरक्षा' में की गई थी, जबकि ईरान इसे सीधे तौर पर उकसाने वाली कार्रवाई मान रहा है।
इस्लामी देशों को एकजुट करने की कवायद
ईरान के सुप्रीम लीडर ने अमेरिकी घेराबंदी के खिलाफ मुस्लिम जगत को एक मंच पर आने का आह्वान किया है। उन्होंने साफ किया कि यह लड़ाई सिर्फ ईरान की नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की संप्रभुता की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जवाबी कार्रवाई के तहत समुद्री बारूदी सुरंगें (Sea Mines) या ड्रोन अटैक तेज किए, तो चल रही शांति वार्ता पूरी तरह पटरी से उतर जाएगी और क्षेत्र में एक बड़े पूर्ण-विकसित युद्ध की शुरुआत हो सकती है।