देशभर में लगातार बढ़ रहे पेट्रोल और डीजल के दामों ने आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। ईंधन की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी का असर अब रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ रही है, जिसका सीधा प्रभाव खाने-पीने की वस्तुओं, सब्जियों, दूध और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और टैक्स संरचना के कारण ईंधन के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं आम जनता का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच पेट्रोल-डीजल के बढ़े हुए रेट ने घरेलू बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
वाहन चालकों का कहना है कि रोजाना ऑफिस आने-जाने और व्यापारिक कार्यों में अब पहले से ज्यादा खर्च उठाना पड़ रहा है। खासकर मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों पर इसका बड़ा असर देखने को मिल रहा है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है, जिससे आने वाले दिनों में बाजार में कई वस्तुएं और महंगी हो सकती हैं।
गृहिणियों ने भी चिंता जताते हुए कहा कि पहले ही रसोई का खर्च लगातार बढ़ रहा था, अब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई और तेज होने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी पर भी इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि डीजल से चलने वाले कृषि उपकरणों का खर्च बढ़ जाएगा।
लोगों ने सरकार से पेट्रोल और डीजल पर टैक्स में राहत देने तथा आम जनता को महंगाई से राहत पहुंचाने की मांग की है। वहीं आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि ईंधन की कीमतों पर जल्द नियंत्रण नहीं हुआ तो आने वाले समय में महंगाई और अधिक बढ़ सकती है।
